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Thursday, October 11, 2007

बरसात


रिम-झिम बरसा पानी

लो भर जाते हैं सागर नाली

नाचते है भालू मोर

बच्चे खूब मचते शोर

आते हैं जब बदल काले काले

होती है बरसात हौले हौले

कड़की बिजली

लो बारिश गिरी

आती है जब बरसात

लाती है हर्याली साथ

जब बारिश को ग़ुस्सा आये

घर पर्वत भी उड़ ले जाये

पर बारिश न होगी जब

जीवन भी न बचेगा तब

- जलपरी 3

तुम्हे बताना चाहती हूँ मैं...


तुम्हे बताना चाहती हूँ मैं

तुम क्या हो मेरे लिए

अगर तुम्हे दोस्त कि जरुरत है

हूँ मैं तुम्हारे लिए


तुम्हे बताना चाहती हूँ मैं

तुम बहुत कुछ हो मेरे लिए

अगर तुम्हे मदत कि जरुरत है

करोगी कुछ भी तुम्हारे लिए


तुम्हे बताना चाहती हूँ मैं

तुम्हे याद करती हूँ मैं

अगर तुम्हे मेरी जरुरत है

तुन्हारे लिए ही हूँ मैं

- जलपरी 3

Monday, October 8, 2007

प्यार


तुम जानते हो कैसा लगता है किसी से प्यार होने पर
कोई तुम्हे चाहने लगता है
कोई हर रात तुन्हारे सपने देखा कर्ता है
किसी को तुम्हारा इंतज़ार रहता है
उसे तुम्हारे बिना अकेलापन महसूस होता है
कोई चाहता है कि किसी दिन तुम उसके पास आजाओ
मेरी आंखों में झानको
तो जानो तुम मेरे लिए क्या हो
अपने दिल में खोजो
अपने मन में खोजो
मुझे वहां न पाओ तो बोलो
तुम्हारे लिए मरना भी मुश्किल नही है
परंतु तुमने तो मेरे साथ ही न दिया
फिर भी मैं तुम्हे अपने दिल से नही निकल सकी
मैने लोगो को चाहा \लेकिन ऐसा नही चाहा जैसा तुम्हे चाहा
अब तुम जा राहे हो
तुम
बस तुम ही थे मेरे लिए
मेरी जिन्दगी में

जलपरी - १, ३

Saturday, October 6, 2007

प्यारे तारे


चमकते हैं देखो ये सब तारे
लगते हैं कितने प्यारे प्यारे
एक चमक कर दूसरा चमकता
फिर चमकते हैं ये सारे

रात अँधेरी जब होती
चमकने लगते हैं ये तारे
घने बादल जब आते हैं
छुप जाते हैं ये तारे

चन्दा के साथी ये तारे
हर पल उसका साथ देते तारे
देखो कितने सारे तारे
लगते हैं हमको प्यारे प्यारे

- जलपरी 3